#शरारत का,अब मन नहीं।मस्ती का अब मन नहीं।दिल आहत, घायल है,सौंदर्य पर चर्चा स्वीकारना,अब मुनासिब नहीं।
#शरारत का,अब मन नहीं।
मस्ती का अब मन नहीं।दिल आहत, घायल है,
सौंदर्य पर चर्चा स्वीकारना,अब मुनासिब नहीं।