वो समझना नहीं चाहते मैं समझा नहीं पाता ,
है प्यार कितना दिल में मेरे मैं जता नहीं पाता ,
जो है तुमसे वो किसी और से नहीं होगा कभी ,
बस यही बात कहनी है पर मैं बता नहीं पाता ,
तुमसे दूरियां करलूं सोचता हूं कर नहीं पाता ,
तुम्हारे करीब आना है मुझे आ पर नहीं पाता ,
भटकता हूं तेरे शहर में गुमराह मुसाफिर सा ,
सब मिल जाता है बस एक तेरा घर नहीं पाता ,
कई दफा दिल में तेरे रहना चाहा रह नहीं पाता ,
इसी दर्द को कहना चाहा लेकिन कह नहीं पाता ,
जाने कितने हमदर्दों ने मेरा हक़ मुझसे छीना है ,
तुमको कोई और जो देखे मैं ये सह नहीं पाता ,
#PoetryOfSJT


