आज अयोध्या में उठी थी,
प्रभु राम की किलकारी।
जन्म लिए थे आज भगवन,
खिल उठी थी दशरथ की क्यारी।
माँ कौशल्या हर्षाई थी,
मन में थी खुशियां भरी।
शांत भाव, प्यारा स्वाभाव,
मुख पे हंसी, श्री राम के।
शीतल मन, स्पष्ट जीवन,
न घृणा, न ही द्वेष था।
ऐसा पौरुष, ऐसी काया,
श्री राम सा न कोई था।
मातृ, पितृ, भ्राता प्रेम के,
उदाहरण श्री राम हैं।
चार्रों धामों जैसा श्रेष्ठ,
प्रभु राम का नाम है।
चेहरे की आभा राम की,
मन को बहुत ही भाती है।
देखकर मुस्कान उनकी,
मन बहुत हर्षाता है।
मंगल मूर्ति श्री राम हैं,
कष्ट निवारक श्री राम है।
सबसे पावन नाम राम का,
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान है।
पालनकर्ता, दुःखहर्ता,
श्री विष्णु रूप भगवान हैं।


