मन के भाव

मन की बातें

यदा-कदा मन में हीं रहें

तो अपेक्षाकृत अच्छा है


मित्रता पर प्रभाव न हो

दूसरों को घाव न हो

हर बात ऐसी हो

आपस में दुर्भाव न हो


कहें बस इतना

की दिल न दुखे

सुहृदता का चिराग

बुझाए न बुझे


चलती रहे

दुनियाँ ज्यों चलती है

आपस में प्रेम भाव रहे

सबसे बड़ी संतुष्टि है