इस जीवन का ये ताना बाना
कुछ समझ ना आये रे
इस पल है खुशी उस पल है गम
कुछ समझ ना आये रे
कुछ नहीं था मेरे पास पर
जी रहा था फ़िर भी मैं बिन मांगे साथी मिल गया,
मुझे प्यार लुटाने को
तुझ से ऐसे अब जुड़ा हूँ मैं जैसे पिछ्ले जन्म का हो नाता
है अपना कैसा बन्धन ये
कुछ समझ ना आये रे ।
इस जीवन का ये ताना बाना
कुछ समझ ना आये रे
इस पल है खुशी उस पल है गम
कुछ समझ ना आये रे
सूने से पड़े इस जीवन में तूने इतनी खुशियाँ दे दी हैं
बरसों से जो झोली खाली थी
उसे अपने प्यार से भर दी है
तूझे दूर ना अब मैं जाने दूँगा
उस रब से भी लड़ जाऊँगाकैसे तेरे कष्ट मिटाऊँ मैं
कुछ समझ ना आये रे
इस जीवन का ये ताना बाना
कुछ समझ ना आये रे
इस पल है खुशी उस पल है गम
कुछ समझ ना आये रे
हैं खड़े क्यूँ हाथ पसारे हमनियति के आगे बेबस से
अब लो ना परीक्षा इतनी भी
कि सब्र का लावा बह निकले
संग मेरी हिम्मत ले जाये
कहीं टूट के मै ना बिखर जाऊँ
तूने खेल ये कैसा रचाया है
कुछ समझ ना आये रे
इस जीवन का ये ताना बाना
कुछ समझ ना आये रे
इस पल है खुशी उस पल है गम
कुछ समझ ना आये रे


