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खुला ज़हन


जो कह रहे थे, तुमसे उल्फत है

वही राहगीर हो जाएं, जरूरी नहीं

ज़हन खुला रखो रोशनदान माफिक

ना जाने कहां से , पुरवाई आ जाए

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