तेरे कदम की खुशबूअब तलक वाबिस्ता है मेरे वजूद सेके जब कभी भी जिक्र होता है मेरा महफिल मेंइश्क भी कह उठता है , कदम गुलाब थे तेरे ।।।
तेरे कदम की खुशबूअब तलक वाबिस्ता है मेरे वजूद से
के जब कभी भी जिक्र होता है मेरा महफिल मेंइश्क भी कह उठता है , कदम गुलाब थे तेरे ।।।