कहां दस्तगीर हुआ हूंआज़ाब से ए मेहबूबअब भी दर्द रहता है हाथों में मेरेजो कभी थामते ते हाथ तेरे ।।।
कहां दस्तगीर हुआ हूंआज़ाब से ए मेहबूब
अब भी दर्द रहता है हाथों में मेरेजो कभी थामते ते हाथ तेरे ।।।