हर शह की उम्र मख़सूस हैफिर वह शाह हो के आम होतुम नयी राहों के मानिंद हो चुके दोस्तयह सफर भी ग़ज़ल हो जाये इस सफर मानिंद
हर शह की उम्र मख़सूस हैफिर वह शाह हो के आम हो
तुम नयी राहों के मानिंद हो चुके दोस्तयह सफर भी ग़ज़ल हो जाये इस सफर मानिंद