मैंने सुनहरा सोचा थाकाला निकला।तभी नींद का एक झोंका आयामैंने उसे फिर सुनहरा कर दिया।अब…सुबह होने का भय लेकर नींद में बैठा हूँया तो उसे उठकर काला पाऊँया हमेशा के लिए उसे सुनहरा ही रहने दूँऔर कभी न उठूँ।