ए खुदा ये तो बता,
ये बारिश की बूंदे है या तू रो रहा है,
क्या तुझे अपने बंदों के दर्द का अहसास हो रहा है?
तूने ही ये हरियाली दी फिर क्यों बिजली गिराई तूने?
मौत देनी ही थी तो क्यों जिंदगी बनाई तूने?
ओठों पर मुस्कान, दिल में दर्द लिए जी रहे सभी,
अब तो सुन ले अपने बंदों की पुकार,
दे दे इस दर्द की दवा,कर दे अपने बंदों को खुशहाल।


