कुछ शेर....


गुज़रे ज़माने की याद सा,फिर,याद उसने किया मुझे,

हवा,सा मुझको बाहों में भर सांसो में भर लिया मुझे,


कोई हश्र कोई मुकाम,ज़िन्दगी का अभी आया नहीँ,

खत्म होती,जाती राहें,सफर खत्म भी होगा,पता नहीं,


फिर सुबह हुई,फिर शाम हुई,हर,रात,यही,सोचता रहा,

कोई,ना गिला शिकवा,सा,सिलसिला यूँही चलता रहा,


~जयेश वर्मा