कुछ लोगनहीं मरतेमरने के बाद भी,

कुछ लोगजीते जी मर जाते हैं,

साँसे ना चलना हीमर जाना नहीं होता,

औरसाँसें चलना हीजीवित रहना नहीं होता,

कुछ लोग अपनी छाती मेंमरने का सामान लिए फिरते हैं,

ये बंदूक़ या बारूद से नहीं मरते,

ये तलवार से काटे नहीं जा सकते,

ना आग से सुलगाए जा सकते हैं,

ना दरिया में डुबाए जा सकते हैं,

ना धरती में दबाए जा सकते हैं,

ना तेज़ाब से जलाए जा सकते हैं,

अंत की कोख में बेठे होने के बाद भी,

ये मिटाए नहीं जा सकते,

ख़त्म नहीं किए जा सकते,

इनको मृत्यु नहीं मार सकती,

मृत्यु इन्हें छू भी नहीं सकती,

इनकी छाती से रिसता प्रेम इन्हें मारता है

इनकी छाती में बसताएक नाम इन्हें मारता है,

प्रेमपीप की तरहइनकी नसों में फैल जाता है,

सिर से पैर तकहर अंग कोखोखला कर देता है,

जब तुमऐसे लोगों को मिलो

तो उन्हें तबाह करने की कोशिश ना करो,

ज़रूरत नहीं,

ये मरे हुए लोग हैं,

जो मारे मारे फिर रहें हैं,

प्रेम में,

प्रेम से छूटने को,

उन्हें जाने दो,

इनकी छाती में मृत्यु का सामान है,

उन्हें जाने दो…!!