
जब अत्याचार और अराजकता का सूरज आसमान में उदित होगा और स्त्रियों के आत्मसन्मान को दूषित करेगा, जब सड़कें और गलियाँ औरतों की अस्मिता का भक्षण करेंगी, जब बेटियों के खून और मांस से भेड़ियों की भूख की पूर्ति की जाएगी, जब इंसान- इंसान की आत्मा तक को नोच खाएगा, जब मानवता की बलि चढ़ेगी
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