जब अत्याचार और अराजकता का सूरज आसमान में उदित होगा और स्त्रियों के आत्मसन्मान को दूषित करेगा, जब सड़कें और गलियाँ औरतों की अस्मिता का भक्षण करेंगी, जब बेटियों के खून और मांस से भेड़ियों की भूख की पूर्ति की जाएगी, जब इंसान- इंसान की आत्मा तक को नोच खाएगा, जब मानवता की बलि चढ़ेगी और न्याय की गरिमा का हनन किया जाएगा, जब दिन अंधकार में डूब जाएंगे और रातें शर्मशार हो जाएंगी, तब मानवजात विनाश के अंतिम चरण में प्रवेश करेगी. आज वो दिन है, आज वो रात है, हम विनाश की कोख में मानवता की आखिरी साँसे गिन रहे हैं. अब हम इंसान नही बचे, हम कलंक हो गए हैं..!!!


