मैं एक जंगल के बीचोबीच खड़ी हूँ । एक घना, काला, भूरा और निर्जन जंगल, जिसके इस पार शुन्यत्व है और उस पार अनंतता हैं। एक दिन मुझे जंगल के उस पार पहोचाना है, देखना है उस पार क्या है। जंगल के जानवर, ऊबड़खाबड़ रास्ते, बदलती ऋतुएँ, आंधिया और अंधकार मुजे डराते नही अब, मैं समझने लगी हूँ जंगल के कानून को। हर रात एक आवाज आती है उस पार से, जो मेरा नाम लेती है, शायद जानती हो मुझे, मेरी कहानी को, मेरे सवालों को, मेरे जवाबों को, मेरे विषाद को, मेरे प्रतिसाद को, मेरे शब्दों को, मेरे मौन को, मेरे गले में फसे हुए प्रेम को। मैं उस आवाज का पीछा कर रही हूँ एक समय से। रात, पत्थर, चाँद और दिशाओं को मैंने दोस्त बना लिया है और उन्होंने कहा वो मेरी मदद करेंगे। रात ने कहा है वो मेरे साथ चलेगी मेरी साथी बनकर जब तक मैं उस पार न पहोच जाऊँ, पत्थरों ने कहा वो मेरे पैरों को कम घायल करेंगे और मेरे खून रिसते घावों को और कुरेदेंगे नही, चाँद ने कहा वो रास्ते में मुझसे बातें करता रहेगा ताकि मुझे डर ना लगे, दिशाओं ने कहा वो जुगनुओं को मेरे साथ भेजेंगी ताकि में रास्ता भटक ना जाऊँ। मैं इस जंगल को एक दिन पार कर लूँगी। उस पार पहुंचकर उस आवाज का चेहरा देखूँगी। मैं देखना चाहती हूँ अनंत के उस पार से आती आवाज किसकी है। शायद ईश्वर की हो। वो मुझे बचाना चाहते हो। शायद वो मुझे नहीं, मुझमे रहे प्रेम को बचाना चाहते हो। ईश्वर जानतें है की समस्त संसार डूब रहा है, अहंकार, अन्याय, अभाव, और अमानवीयता के दरिया में, और संसार को डूबने से सिर्फ प्रेम बचा सकता है। वो मुझे नही बचाना चाहते। वो बस प्रेम को बचाना चाहते हैं। 

और इसीलिए एक दिन मैं ये जंगल पार कर लूँगी और प्रेम को बचा लूँगी, ताकि एक दिन प्रेम, तुम्हें, मुझे और ईश्वर, हम सबको बचा सके ..!!