जो पुरुष, अपनी मातृभूमि, माँ और प्रेमिका से अत्यधिक प्रेम करता हो, इतना प्रेम जो हदय के चार कोष्ठों से संभाला ना जा सके, जो स्त्रियों को उनकी आँखों की उलझनों से पढ़ लेता हो, जो जानता हो कि स्त्री अधिकार नही है, स्त्री स्वीकार है, जिसे पता हो स्त्री आकर्षण नही, आध्यात्म है, शरीर मात्र नही है सर्ग है, स्त्री से हार नही जाते, वो तुम्हारी जीत है, जो हाथ छूने से पहले हाथ पकड़ना जानता हो, जिसके शब्द सनातन हो और जिसका वचन नियति हो, जिसे पता हो प्रेम के बिना जीने में और प्रेम के बिना मरने में क्या अंतर है, जो जन्म और मृत्यु से किंचित भयभीत नहीं, जो प्रेम में राधा हो और प्रेम निभाने में कृष्ण हो, जो सहज हो, सबल हो, सरल हो, समर्थ हो, स्नेह हो, वो पुरुष, ईश्वर द्वारा रचा गया कोई देवदूत है, और उसे ईश्वर ने अपनी आत्मा के सात टुकड़ों की ऊर्जा से बनाया हैजब वो तुम्हारे सामने आए उसे पहचानना, उसकी आँखों में देखना, और उन सात टुकड़ो की जीवन के अंत तक रक्षा करना, क्योंकि मृत्यु के बाद जब तुम ईश्वर की चौकट पर हिसाब के लिए जाओगी, ये सात टुकड़ें तुम्हारी रक्षा करेंगे..!!!