मैं प्रेम से मिली,
प्रेम मुझसे मिला,
मुझे नहीं पता की प्रेम ने मुझमें क्या देखा,
पर मैंने, प्रेम में देखा, स्वयं ब्रह्म,
ब्रह्म होने का सुख, दुःख, संघर्ष, व्यथा और विद्रोह,
मैंने देखी ब्रह्म होने की महिमा, यश, शक्ति, सत्ता और मनुष्य से ब्रह्म तक पहोचने की यात्रा,
और मुझे उस यात्रा से प्रेम हो गया..!!
