कुछ स्त्रियां प्रेम में,
अपनी शांति,
स्थिरता,
स्वतंत्रता,
सुंदरता,
सहनशीलता,
स्वाभिमान,
सपने,
श्रृंगार,
सुख,
सब छोड़ आती हैं प्रेमी की चौकट पर,
उसके बाद उनके पास एक ही चीज़ बचती है,
साहस,
उसी के चलते वो जीवन की परिक्रमा पूर्ण करती हैं,
और मृत्यु के आलिंगन में लिपटे हुए,
संसार से जाते वक्त अपने प्रेम को साथ ले जाती हैं,
जितना प्रेम ईश्वर के घर से लेकर आई थी,
उससे चार गुना ज्यादा प्रेम वो वापस ले जाती हैं,
प्रेमी के द्वारा अस्वीकार किया गया उनका प्रेम,
ईश्वर के रचे हुए कुल प्रेम की राशि में जुड़ जाता है,
और ईश्वर ये चार गुना बढ़ा हुआ प्रेम,
फिर किसी स्त्री की छाती में लौटा देते हैं,
प्रेम अविनाशी रहता है, विनाश के बाद भी..!!!


