मैं जब टूटूँगी तो, 

गिरूँगी नहीं, 

डरूँगी नहीं,

मरूँगी नहीं,

मैं, हवा हो जाऊँगी, 

नवा हो जाऊँगी,

लवा हो जाऊँगी,

मैं, बनकर मिट जाने को नहीं बनी,

मैं, होकर, ना होने को नहीं बनी,

जब तुम, तुम्हारा प्रेम, तुम्हारे होने का भ्रम, 

ढह जाएगा, ढ़ेर हो जाएगा, ख़त्म हो जाएगा, 

तब भी, मैं रहूंगी, 

मेरा प्रेम, तुम्हारे प्रेम के, स्वीकार का आश्रित नहीं,

मेरा प्रेम तुम्हारे प्रेम के, अस्वीकार से पराजित नहीं,

समय के अंतिम दिन की सुबह और शाम में, और उसके बाद भी, जब जगत में कुछ नहीं रहेगा, 

मेरा प्रेम रहेगा, मैं रहूंगी.!!!


नवा- गान, आवाज, गाना

लवा- भारद्वाज पक्षी