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शायरी


पहली बार तुझे देखा तो अपना सा लगाकही गुम हुआ था जो, अरमान फिर से जगा ।

सौ कदम बढ़ाना था, मात्र एक कदम पर ही रह गएसामाजिक बंदिशों ने जकड़ा, और अरमान सारे बह गए ।

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