पहली बार तुझे देखा तो अपना सा लगाकही गुम हुआ था जो, अरमान फिर से जगा ।सौ कदम बढ़ाना था, मात्र एक कदम पर ही रह गएसामाजिक बंदिशों ने जकड़ा, और अरमान सारे बह गए ।
पहली बार तुझे देखा तो अपना सा लगाकही गुम हुआ था जो, अरमान फिर से जगा ।
सौ कदम बढ़ाना था, मात्र एक कदम पर ही रह गएसामाजिक बंदिशों ने जकड़ा, और अरमान सारे बह गए ।