कैसी है यह रंगीली दुनियाकोई समझ नहीं पायाआना जाना चलता रहतारुकना चाहते भी न रुक पायाजैसे कोई सुंदर सपनाआंख खुली तब टूटा पायाजैसे कोई सुंदर मेलाकोई अपना कोई परायाकरते रहो बस हिसाब किताबक्या खोया क्या पाया