मै दादी से जब भी पूछती " तिजोरी में क्या है दादी?"
वो अक्सर टाल जाती और कभी कहती
" जो कुछ भी है तेरा ही है।"
मैं भी पीछे पड़ गई थी उस दिन
" बताओ ना दादी"
वो अचानक बोल पड़ी
"मेरे सपने
तिज़ोरी में संभाल कर रख दिए हैं "
उनकी मृत्यु के बाद तिजोरी खोली तो सब हैरान रह गए। तिजोरी में गहनों के साथ उनकी एक डायरी भी थी। डायरी में सूखे फूल, रंग बिरंगे रेशमी धागे, रंगीन पेन और मोर पंख बहुत ही सलीके से सहेजे हुए रखे थे।
मै दादी कि तिज़ोरी देख कर समझ गई कि सफ़ेद साड़ी में उनके सपनों के सारे रंग समा गए थे वो बाल विधवा जो थी।


