सूख चुकीनदी में भीसैलाब ले आती हैंजब आंखों सेजम के बरसती हैंतेरी यादरोके से किसी केकहां रुकती हैंना दिन देखती हैंना रातयादों काक्या ही कहें
सूख चुकीनदी में भीसैलाब ले आती हैंजब आंखों सेजम के बरसती हैंतेरी याद
रोके से किसी केकहां रुकती हैंना दिन देखती हैंना रातयादों काक्या ही कहें