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प्रेम लीला

शब्द पढ़े, 
फुहारों से,
थी कुछ बूँदें भर,
जिनकी कहानी,
फव्वारे के 
पाइप के पीछे,
जुड़ी बहती नदी,
में तिर कर,
कण कण पिघल,
उत्तर के पर्वत शिखरों,
से फिसले बरफ के,
कतरों सी,
उड़ी थीं देश विदेश,
बादलों पर लद कर,
जो कुछ फाये भाप के,
लह
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