सोना सुबह से फुलझड़ी के लिए जिद कर
रही है । मां ने बहुत समझाया पर वो रोए जा रही है।
"मुझे भी फुलझड़ी चाहिए अम्मा आज तो
दीवाली है "
उसका आज त्यौहार के दिन यूं रोना कमला को अच्छा नहीं लग रहा था पर
वो करे भी तो क्या
बिल्कुल पैसे नहीं हैं उसके पास
काम भी तो छूट गया इस लॉक डॉउन के चक्कर में
कितने दिनों से घर पर ही बैठी है
उसे तो आज के लक्ष्मी पूजन की भी चिंता सताये जा रही थी
वो कैसे बताएं सोना को कि उसके बापू ने भी कई महीनों से रुपए नहीं भेजें है पता नहीं शहर में उन्हें कोई काम मिला भी है या नहीं
तभी डाकिया एक पैकेट लेकर आया
पैकेट में कुछ उपहार मिठाई और रुपए थे साथ में एक पत्र
मेरी लाडो
बेटियां तो घर की लक्ष्मी होती हैं और वो दीवाली पर रोया नहीं करतीं ।अम्मा को बताना मुझे अब काम मिल गया है।
नए सेठ जी ने एडवांस दिया है ।
कुछ रुपए भेज रहा हूं तू अम्मा के साथ बाज़ार से अपनी पसंद की चीज ले लेना और हां अम्मा को भी एक नई साड़ी लेने को कहना। मैं जल्दी ही आने की कोशिश करूंगा।
तुम्हारा बापू
सोना की खुशी का ठिकाना ना रहा वो इधर से उधर उछलने लगी।
उसकी हंसी से फुलझडियां झर रही थी।


