प्रेम तो
प्रियतम का चित्र
स्वयं को चित्र
प्रतिबिंब
श्वेत श्याम बादलों की दीवार पे
उकेरा हुआ इन्द्रधनुष
घने छायादार वृक्ष की शाख से
बूँद बूँद टपकता शहद
नर्म ओस से भीगी हरी घास पे
झरता हुआ पारिजात
अलसायी भोर में अधखिले फूलों पे
मंडराते बाबरे भ्रमर
पान में खुशबू से लबरेज़ मुँह में
घुलता महंगा किमाम
जाड़ो के सर्द दिन में खिड़की
से अंदर आती धूप
जेठ की तपती दोपहर में
खिलता हुलसता गुलमोहर
नीलवर्ण आकाश में स्वछन्द
विचरते विहग वृन्द


