पूछती है मां दुर्गे



बोते हो ज्वारे कराते हो कन्या भोज

और मार डालते हो भ्रूण में ही कन्या

तो क्यों पूजते हो निर्दय तुम नवरात्र


चढ़ाते हो चुनरी करते हो मेरा श्रृंगार

और होता रहे यहां स्त्रियों का बलात्कार

तो क्यों पूजते हो निर्लज्ज तुम नवरात्र


करते हो चौकी पूजा और विशाल भंडारे

और कोई विधवा मां वृध्दाश्रम में भूखी हो

तो क्यों पूजते हो निर्मम तुम नवरात्र



जब तक मरे भ्रूण में कन्या तो काहे की जय जय कार

जब तक होते रहें दुराचार तो काहे का नवरात्र

मां रोये बैठी कोने में तो काहे का दुर्गा पंडाल



कर ना सको गर तुम मेरी स्त्री रूपों का सम्मान

पात्र नहीं हो मेरी भक्ति के ले जाओ ये पूजा थाल

शक्तिपुंज है हर स्त्री मेरी वंशजा मेरी अवतार


हे राम के वंशज तुम करो राम सम अपना आचार

करो राम सी शक्ति पूजा धरो राम सी मर्यादा

नव सिद्धि स्वयं सिद्ध हो स्वीकृत तेरा नवरात्र



#भाव केवल इतना है

प्रतिमा में देवी

या

प्रति मां में देवी




मां समाज को विकृतियों से मुक्त करें और अन्तकरण को अपनी भक्ति दे ।

मां सभी का मंगल करें और अपना स्नेह और आशीर्वाद बरसाती रहें।



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