मुदित कली

गाते भ्रमर

खिले फूल

सुगंधित पवन

चहकते विहग

बसे हुए नीड़

बसंत ऋतु

उड़ती पतंग

रजत चांद

प्रेम प्रसंग

नारी श्रृंगार

झूलते बच्चे

धूप सेकते बुजुर्ग

थके पथिक

रजत चांद

वैजयंती माल

मृदु फल भोग

ये सब ऋणी है

नेपथ्य में जीते

माली के

वो ही इनके होने

का सबसे सुंदर

वजह है

उगता सूरज

साक्षी है