वे सब जो
व्यूह रचते हैं
वे भी जो
घेर लेते हैं
हर ओर से
उस निश्छल
वीर पराक्रमी योद्धा को
जो ललकारता है
रथी और महारथियों को
करता है अचंभित
अपने युद्ध कौशल से
भीरुओ के छल कपट से
अनभिज्ञ वो योद्धा
व्यूह भेद तो लेता है
पर निकल नहीँ पाता
अभिमन्यु की हत्या
में सहभागी
कर्मगति भोगेंगे
सत्यसे सनातन शाश्वत
है प्रभु की दंड संहितायें


