उस
कहा सुनी
होने के बाद
क्या कहना था
क्या सुनना था
चुपके से
खिसका
कोने में
तेरे मेरे बीच
का प्रेम
पिछले
कुछ दिनों से
कितना कुछ
घट रहा है
तेरे मेरे बीच
प्रेम भी
हर असहमति
विद्रोह तो नहीं
बस इतना ही
कहा था मैने
हाथ छुड़ा के
मुझसे किये
वादों के
साथ ही
भुला दिया
मुझसे किया
प्रेम भी
जेठ की
तपती धूप में
गुलमोहर की
छांव के जैसा
उसका प्रेम
शर्त है उसी
साये में
सिमट कर
रहने की
जीवन में
छाया प्रतिछाया सा
आभास ही
रह गया प्रेम


