नीले पीले

लाल गुलाबी

रंगों में सुरभि

भर देता है

अलमस्त सोई

कलियों के मन में

महज धूप का 

छोटा सा टुकड़ा


मीठा मधुर

चहकता कलरव

भर देता है

गाती चिडिया

की बोली में

महज धूप का छोटा सा

एक टुकड़ा


हौसलों की

उंची उड़ान

भर देता है

कच्चे पक्के

छिपा के रखे

सपनो में

महज

धूप का

छोटा सा

टुकड़ा



प्रेम हिरोलें

भर देता है

नादान

शरारतों की

आंख मिचौली में

महज

धूप का

छोटा सा

टुकड़ा


खुशबू से

सराबोर

मादकता

भर देता है

महुआ

के फूलों में

महज

धूप का

छोटा सा

टुकड़ा



अविरल

निर्मल जल

भर देता है

जमी ठिठुरती

नदियों में

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा



सिहरन

भर देता है

काली अंधियारी 

कोहरे लिपटी

रात में 

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा



ठहरे पथिक के

कुम्लहाये से

मन में

सत्यमेव जयते

का विश्वास

भर देता है

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा


जीवन

भर देता है

धरती के गर्भ

सोये पड़े

नन्हें बीजों में

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा




शीतल समीर के

झोंकों से

चुपचाप

शरद ऋतु की

गुलाबी रंगत में

प्रीत सुहानी

कह देता है

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा



श्वेत श्याम बादलों

की भित्ति पे

निष्कासित

जलबिंदु की

उड़ती टोली से

इंद्रधनुष

रंग देता है

महज 

धूप का 

छोटा सा

एक टुकड़ा