आओ थोड़ी खुशियां बांटे
इस बार नए ढंग से दीवाली मनाएं
पड़ोस की बस्ती में
दीवारों पर पसरी
उदासी हटा मुस्कान के
चटख रंग पोत आयेंगे
किताबों की रोशनी
कलम की फुलझड़ी से
शुभ दीवाली लिख आयेंगे
दूर बसे वृद्ध आश्रम में
पथराई आंखों का
टिमटिमाता लंबा इंतजार
बांट आएंगे
चैन से बैठेंगे बतियायेंगे
आशीष की पोटली में
कुछ सुनहरे पल बटोर लाएंगे
दिवाली पर आना है उनको
पुलक रहा है घर आंगन
बाट जोहती घर की खुशियां
द्वार रंगोली काढ़ रही हैं
पर सरहद से लौटी है बस
केवल उनकी वर्दी है
जो बैठ अंधेरे सिसक रहे
जिनसे छिटकी दूर हंसी
जो घोर निराशा में डूबे
जिनसे अपने छूटे रूठे
उस द्वार पर दीप जलाएं गे
हटा घोर निराशा की अमावस
हम सब मिल दिवाली मनाएंगे
सभी स्नेही परिजनों को शुभ दीपावली


