
कुरुक्षेत्र की रण भूमि में
युद्घ सनातन जारी है
कुचक्रों का दौर चल रहा
रण में विजय पाने को
कूटनीतियां रची जा रही
शत्रु को मार गिराने को
नया सूर्य उदित हुआ है
नभ पे छा जाने को
अभिमन्यु अति उत्साहित है
अपना शौर्य दिखाने को
आवश्यक था जो रणकौशल
उसने गर्भस्थ ही पाया है
जान गये थे शत्रु सारे
पिता अर्जुन हैं साथ नहीं
महापराक्रमी व्यूह रच रहे
अभिमन्यु की हत्या के
वीर प्रतिष्ठित महारथी अब
अभिमन्यु के सन्मुख थे सब
अरि सेना के प्रतिभागी
धर्म मर्यादा सब भूल गए
व्यूह के चक्र भेद कर वो
केन्द्र बिंदु तक पहुंच गया
छल प्रपंच की छद्म युद्घ में
वीर बालक को घेर लिया
नीति नियमों की अनदेखी से
देखो युध्द अब होता है
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