Poetry 1 min read 784.1K reads

Muhalat


पता है थोड़ी मुहल्लत चाहिए तुझेमुझे अपना ने के लिए

ये तो तेरे गुस्से पे भी दिल आ रहा हैवरना पराए को कोन हक से चिड़ाता है

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