तुमने आसिफ़ा में देखा मुसलमान, मैंने देखा खोते उस बेटी को अपनी जान। तुमने गीता में देखा हिन्दू, मैने देखा बढ़ता देश में हैवान।   रूह कांप रहा है मेरा आखिर क्यों, इंसानियत की चादर समेट रहा इंसान। ए देश वासियों धर्म और राजनीति से ऊपर उठो, देखो किधर जा रहा अपना हिंदुस्तान।