नज़र उठी आसमान को,बस कोहरा दिख रहा है,जुकाई जो आंखे तो ज़मीर,ज़मीन पर बिखरा है।
नज़र उठी आसमान को,बस कोहरा दिख रहा है,
जुकाई जो आंखे तो ज़मीर,ज़मीन पर बिखरा है।