ख़ामोश लफ़्ज़

उदास नग़मे

लाचार रिश्ते

बेचैन वक़्त

ये छुअन के दायरे...


सुलह कर लो न ज़िन्दगी

अब मुस्कराने को जी चाहता है।

~अनिता सभरवाल