मचलती-तड़पती लहरें क्यों

ज़िद करती हैं चाँद को पाने की

वो भी तो झुक आता है 

फूल चाँदनी के बरसाने को 


चाँदनी के आगोश में लहरें क्यों

मदमस्त हो जाती हैं

नील अँधेरों के साए में

समंदर थिरक-सा जाता है...


क्या चाँद का घर ज़मीन पर था

या समंदर आसमाँ में रहता था!!