बहुत फ़र्क़ होता है

एक मर्द और 

औरत की मौत में-

मर्द की मौत 

जस की तस 

स्वीकार लेते हैं

उसके दोस्त 

और दुश्मन भी!

लेकिन जब औरत मरती है 

तो हज़ारों सवाल 

उठ खड़े होते हैं-

क्यों मरी?

कैसे मरी?

किसने मारा?

किस तरह?

कोई दोस्त या प्यार?

या बलात्कार?

ससुराल का अत्याचार?

या मामूली दुर्व्यवहार?

फ़िर...

पुलिस, डॉक्टर, अदालत 

और उसे खो चुके, अपनों की 

गवाहियों का दौर...

दरअसल बाहरी लोग

नहीं जानते कि

औरत अकेली नहीं मरती 

मार जाती है 

उन अपनों को भी

जो उदास अंधेरों में 

उसकी याद में,

इंतज़ार में,

रोते हैं ताउम्र...

........

बहुत फ़र्क़ होता है 

एक मर्द और औरत की 

मौत में,

बिल्कुल वैसा फ़र्क़

जैसा कि होता है 

एक मर्द और औरत के 

 जन्म में ...


    ~अनिता सभरवाल