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मेरा पहला प्यार- मेरी मां

"मेरा पहला प्यार- मेरी मां"

तुम मानवता की अतिश्योक्ति हो

सुंदरता की विभक्ति हो

मानवीकरण हो भावों का

जो यमक सा बांचू नाम तुम्हारा...

कभी सुबह की - किरणों सी ( हो)

 तो कभी शाम की छांव हो...

हर बार अर्थ हो जिंदगी ....

कठिन है बचना आपकी यादों से...

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