"मेरा पहला प्यार- मेरी मां"

तुम मानवता की अतिश्योक्ति हो

सुंदरता की विभक्ति हो

मानवीकरण हो भावों का

जो यमक सा बांचू नाम तुम्हारा...

कभी सुबह की - किरणों सी ( हो)

 तो कभी शाम की छांव हो...

हर बार अर्थ हो जिंदगी ....

कठिन है बचना आपकी यादों से...

मेरे मस्तिष्क में गूंजते सुरो का अनुप्रास हो

तुम्हें रूपक कैसे कहूं चांद का...

चांद तुम्हारा रूपक है

झनकार तुम्हारे मृदु शब्दों का... मानो गीता का पाठ कोई

तुम गुणों की सूचक मात्र नहीं... मेरे जीवन का अलंकार हो

कभी सुबह की - किरणों सी

तो कभी शाम की छांव हो.....


_अलका पटेल

@alkadn1019