अदावतों का कहर नया है

चलन वही है, शहर नया है

गवाही देती हैं बिखरी लाशें,

यहाँ हवा में ज़हर नया है

हैं ठंडे चूल्हे, शहर जला है

अनल वही है, हुनर नया है

पलट के देखा नहीं किसी ने

झुकी हैं आँखें, ये डर नया है

तेरे सितम का असर हुआ है

नहीं हैं आँसु, सबर नया है