जब थी जरूरत,उठी नहीं एक बार भी हूक ।अब समय हीं न शेष रहा,तब जगी है मंजिल पाने की भूख ।।
जब थी जरूरत,उठी नहीं एक बार भी हूक ।
अब समय हीं न शेष रहा,तब जगी है मंजिल पाने की भूख ।।