कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी
तुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी
ऐसे रिश्ते का भरम रखना बहुत मुश्किल है
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी
कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी
तुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी
ऐसे रिश्ते का भरम रखना बहुत मुश्किल है
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी

Zahid Hussain (born 8 February 1940), better known by the pen name Wasim Barelvi, is an eminent Indian Urdu language poet. He was born in Bareilly, Uttar Pradesh. His ghazals, many sung by Jagjit Singh, are very popular. He has been awarded with the "Firaq Go…
View profile & all 22 Poems / Storiesतुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आतेइसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी हैजो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसेतेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे
लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होताहमारे दौर में आँसू ज़ुबाँ नहीं होता