व्यर्थ गर्व

Viyogi HariViyogi Hari1 Jan 1895

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अहे गरब कत करत तूँ खरब पाय अधिकार।
रहे न जग दसकंध-से दिग्विजयी जुगचार॥

कनक-पुरी जब लंक-सी झुरी अछत दसकंध।
तुव झोपरियाँ काँस की कौन पूँछिहै अंध॥

Viyogi Hari
About the poet

Viyogi Hari

Viyogi Hari (1895–1988 ) was a famous Gandhian and Hindi writer. He was a leading poet of modern Brajbhasha, He was awarded Mangalaprasad Award For "Veer-Satsai". He edited many texts, compiled a collection of ancient poems and compiled the works of saints. H…

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