सपनों में

Vishnu NagarVishnu Nagar14 Jun 1950

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मैं उसके सपनों में शायद ही कभी आया हूँ
मगर वह मेरे सपनों में कई बार आई है
हो सकता है कि वह किसी और के सपनों में आना चाहती हो
मगर वह न आने देता हो
इसलिए हताशा में वह मेरे सपनों में चली आती हो

सपने ऐसे भी हों जिनमें हम दोनों एक दूसरे से मिलें
फिर यथार्थ में दोनों कहीं मिले तो ऐसे शरमायें
जैसे कल ही कहीं चोरी छुपे- मिले थे
और आगे भी इरादा इस तरह मिलने जुलने का है
मगर इस बीच कोई समझ जाये कि दोनों के बीच कुछ है
वह मुस्कुराये और हम दोनों उसकी मुस्कुराहट के जवाब में ऐसे मुस्कुरायें
जैसे हमारी चोरी पकड़ी गयीं
तो भी क्या!

Vishnu Nagar
About the poet

Vishnu Nagar

Vishnu Nagar born in 14 June 1950. He Lives in delhi. His four books have been published

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