वर्षा राग 1's image
0237

वर्षा राग 1

ShareBookmarks


बरसे मेघ भरी दोपहर, क्षण भर बूंदें आईं
उमस मिटी धरती की साँसे भीतर तक ठंडाईं
आँखें खोलें बीज उमग कर गगन निहारें
क्या बद्दल तक जा पाएंगे पात हमारे?

Read More! Learn More!

Sootradhar