मैं हरि, पतित पावन सुने's image
1 min read

मैं हरि, पतित पावन सुने

TulsidasTulsidas
0 Bookmarks 564 Reads0 Likes

मैं हरि, पतित पावन सुने।
मैं पतित, तुम पतित-पावन, दोउ बानक बने॥
ब्याध गनिक अगज अजामिल, साखि निगमनि भने।
और अधम अनेक तारे, जात कापै गने॥
जानि नाम अजानि लीन्हें नरक जमपुर मने।
दास तुलसी सरन आयो राखिये अपने॥

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts