ऊँघतीं हैं
दोपहर की कच्ची डगार से
मुनगे की सूख चुकी फलियाँ
सींच जाती है
उड़ती कोई चिड़िया
दूबरी
परछाईं से
ऊँघतीं हैं
दोपहर की कच्ची डगार से
मुनगे की सूख चुकी फलियाँ
सींच जाती है
उड़ती कोई चिड़िया
दूबरी
परछाईं से

Teji Grover is a Hindi poet, fiction writer,translator and painter. She is regarded as an important voice in Hindi poetry in the generations born after 1950. According to poet and critic Ashok Vajpeyi, "Teji Grover shapes her language away from the prevalent…
View profile & all 17 Poems / Storiesनील मणि मुखपोखर में खड़ा सूर्य
जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वहजिस भी दूर्वा की ओसभरी लोच में नम
भाषा के साथ खेल सकते हो(खेले भी हो ज़ार-ज़ार उसकी ध्वनियों और नुक्तों से)
तुमने एक फूल को देख लिया है तालाब की इन्द्रियों में गुलाबी रिसतेभैंस की कालिख़ से सुबहो-शाम ख़ून पीते हुए जीव
पूरा हो चुका चाँदझर चुकी सेमल और टेसू की सुर्ख़ी