एक आदमी दो पहाड़ों को कुहनियों से ठेलता's image
0218

एक आदमी दो पहाड़ों को कुहनियों से ठेलता

ShareBookmarks


एक आदमी दो पहाड़ों को कोहनियों से ठेलता
पूरब से पच्छिम को एक कदम से नापता
बढ़ रहा है

कितनी ऊंची घासें चांद-तारों को छूने-छूने को हैं
जिनसे घुटनों को निकालता वह बढ़ रहा है
अपनी शाम को सुबह से मिलाता हुआ

फिर क्यों
दो बादलों के तार
उसे महज उलझा रहे हैं?

Read More! Learn More!

Sootradhar