या लकुटी

RaskhanRaskhan1 Jan 1548

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या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।

आठहुँ सिद्धि, नवों निधि को सुख, नंद की धेनु चराय बिसारौं॥

रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।

कोटिक हू कलधौत के धाम, करील के कुंजन ऊपर वारौं॥

 

Raskhan
About the poet

Raskhan

Syed Ibrahim Khan (born 1548 A.D.) was a poet of Pashtun origins, who became a devotee of Lord Krishna. He is known to have lived in Amroha, India. Raskhan was his takhallus in Hindi. In his early years, he became a follower of Lord Krishna and learned the bh…

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